हरिद्वार, 20 जून 2026: हरिद्वार में आयोजित होने वाले आगामी कुंभ मेला-2027 को दिव्य और भव्य बनाने के लिए शासन-प्रशासन और संत समाज के बीच निरंतर संवाद जारी है। संतों के मार्गदर्शन और सुझावों के अनुरूप ही मेले की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि कुंभ का आयोजन प्रभावी और सुव्यवस्थित हो सके।
संतों की गरिमा और परंपराओं को सर्वोच्च प्राथमिकता
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कुंभ केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं का विराट उत्सव है। सरकार की प्रतिबद्धता है कि व्यवस्थाओं में संत समाज की गरिमा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
अखाड़ों के साथ निरंतर संवाद
मेला प्रशासन के अधिकारियों ने हरिद्वार के प्रमुख अखाड़ों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें की हैं। जिन अखाड़ों के साथ चर्चा की गई, उनमें शामिल हैं:
- श्री निरंजनी अखाड़ा
- श्री जूना अखाड़ा
- श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा
- श्री पंचायती अटल अखाड़ा
- श्री पंचायती आनंद अखाड़ा
- श्री पंच अग्नि अखाड़ा
- श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा
- श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन
- श्री पंचायती उदासीन नया अखाड़ा
- श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा
- श्री निर्वाणी अणि अखाड़ा
- श्री दिगम्बर अणि अखाड़ा
- श्री निर्मोही अणि अखाड़ा
अखाड़ों ने क्या दिए सुझाव?
प्रमुख संतों ने अमृत स्नान, पेशवाई, आवासीय व्यवस्था, यातायात, सड़क-पुलों का रखरखाव, घाटों की सफाई, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। संत समाज ने आग्रह किया है कि आध्यात्मिक गरिमा को बचाते हुए आधुनिक सुविधाओं का समन्वय सुनिश्चित किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिले।
अखाड़ों के प्रमुखों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा प्रारंभिक चरण से ही संतों को साथ लेकर चलना एक सराहनीय कदम है। संत समाज ने मेले की सफलता में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाया है।
